१९९१-१९९७

"डॉ.निखिल मेहता द्वारा १९९१ में प्रवरा मेडिकल कॉलेज, लोनी यहाँ से एमबीबीएस पूरा किया. सौभाग्य से, अपने एक दोस्त के साथ इंटर्नशिप करते वक्त, वैद्य अतुलचंद्र थॉम्ब्रे ने उन्हें पुणे - तिलक महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, पुणे में योग - आयुर्वेद परिचय पाठ्यक्रम में जाने की सलाह दी| आयुर्वेद के अपने पुराने ज्ञान का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा और १९९६ तक उन्होंने विभिन्न डॉक्टरों से आयुर्वेद को गंभीरता से सीखना और अनुभव करना शुरू कर दिया!उन्होने धुले में वरिष्ठ पंचकर्म विशेषज्ञ पी.टी. जोशी!वहां पर करीब छह महीने तक उसके साथ रहे और उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग सीखा!"

१९९८

"१९९८ में उन्होंने अपनी निजी प्रैक्टिस शुरू की, जहां उन्होंने अपने आहार और जीवन शैली के माध्यम से और दवाईयो के उपयोग से कम से कम आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों से रोगियों का इलाज किया!धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि उनके अधिकांश मरीज आयुर्वेद के बुनियादी नियमों से अनभिज्ञ थे, जिससे पता चलता है कि वे बार-बार वही गलतियां कर रहे थे और बीमार हो रहे थे!"

१९९९

"रोगियों से बहुधा होनेवाली गलतियों को केवल उनके ही माध्यम से रोकना चाहिए इस उदेश्य से १९९९ में १०-१२ घंटे की स्वास्थ्य स्वतंत्रता कार्यशालाये शुरू की गई जिसमें उन्हें जीवन शैली, दैनिक दिनचर्या, मासिक धर्म, घरेलू उपचार, मानसिक स्वास्थ्य और बहुत कुछ के बारे में बताया जाता हैं!"

१९९९ से २०१८

  • स्वास्थ्य स्वतंत्रता कार्यशाला में हजारों लोगों ने भाग लिया!
  • कई विदेशी भारत आए और स्वास्थ्य स्वतंत्रता कार्यशाला में भाग लिया, कुछ इस ज्ञान को साझा करने के लिए विदेश गए!
  • स्वास्थ्य स्वतंत्रता कार्यशालाएँ दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, भोपाल, बैंगलोर में शुरू हुईं!
  • कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यशालाएँ आयोजित की गईं!
  • कई अखबारों में यह काम देखा गया!